बकरीद पर कुर्बानी के बकरे जब्त करने वाले पुलिसवालों के विडियो का वायरल सच

दरअसल यह वीडियो संतकबीरनगर जिले के धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुसहरा गांव का है। यह वीडियो 2017 का बताया जा रहा है। बताया जाता है कि मुसहरा गांव में 2007 से ही कुर्बानी पर रोक लगी हुई है। कुर्बानी पर रोक की वजह उसी साल दो गुटों के बीच हुआ समझौता है। जिसके बाद से गाँव में कुर्बानी पर रोक ही लगा दी गयी।

मुसहरा नाम के इस गांव में साल 2007 सात से ही बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी पर प्रतिबंध है। पुलिस का कहना है कि इस गांव में बकरीद पर कोई भी बकरे नहीं काटता औऱ यह त्योहार हंसी-खुशी के साथ बीतता है। इस गांव की एक और अनोखी बात है कि यहां होली पर हिंदू समुदाय के लोग होलिका दहन भी नहीं करते।

दरअसल 2007 में कब्रिस्तान के पास होलिकादहन करने से दो समुदायों में झड़प हो गई थी। जिसके बाद प्रशासन ने दोनों के बीच सुलह कराई। जिसमें दोनों गुटों के बीच समझौता हुआ कि मुस्लिम जानवरों को नहीं काटेंगे और हिंदू होली पर होलिकादहन नहीं करेंगे।

जिसके बाद से दोनों समुदाय गान में शांति और सौहार्द बनाये रखने के लिए अपनी मर्जी से बकरीद में कुर्बानी न देने और होलिका दहन न करने की ठान ली। तब से लेकर आज तक 12 सालों में गाँव में बकरीद के मौके पर किसी भी घर में बकरे की कुर्बानी नहीं दी जाती।

वहीं इसका एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमे पुलिस वाले बकरों को ले जा रहे है और औरते रो रही हैं। वायरल वीडियो से इस तरह की अफवाहें फ़ैल रही है कि बकरीद में कुर्बानी देने से रोकने के लिए पुलिस जबरन बकरों को अपने कब्जे में ले रही है। लेकिन इसके उल्ट लोगों कि रजामंदी से बकरों को पुलिस ले जाती।

पुलिसवाले गांव में जाकर सभी घरों से बकरों को ले लेते है और मदरसे में ले जाते हैं। फिर इन्हें मदरसे में 3 दिनों के लिये रखा जाता है। तीन दिन इन बकरों की देखरेख के लिए वेटनरी डॉक्टर भी मदरसे में होता है।

वीडियो में पुलिसवाले बकरों को घर से ले जाते टाइम मालिक का नाम भी पूछ रहे हैं जिससे बाद में वापस करने में परेशानी न हो और 3 दिन बाद वापस दे दिए जाते हैं। वहीं वीडियो में रो रही औरतें बकरों से लगाव की वजह से रो रही हैं न कि किसी दबाव और जबरदस्ती से।

बकरीद पर पुलिस की पाबंदी का वायरल सच

बकरीद पर पुलिस की पाबंदी का वायरल सच

Posted by ABP News on Saturday, August 18, 2018