मोदी सरकार को मुस्लिम प्रथाओ के खिलाफ आवाज़ उठाने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका

नई दिल्ली…सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों में प्रचलित बहु विवाह और निकाह हलाला को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने की अपील ठुकरा दी।सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने ये मामला आया तो कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर केंद्र सरकार अपना जवाब दाखिल करेगी उसके बाद ही संविधान बेंच का गठन किया जाएगा।

याचिकाकर्ता ने जब इसे जल्द सुनवाई के लिए मेंशन किया तो कोर्ट से कहा कि उसे धमकियां मिल रही हैं कि याचिका वापस ले लो।तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सभी शिकायतों पर विचार करेंगे।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही ये मामला विचार के लिए संविधान पीठ को भेज चुका है।

इस मामले को लेकर केंद्र सरकार चाहती थी कि जल्दी सुनवाई हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया जिससे भाजपा की रणनीति को काफी हद तक धक्का लगा है।

जाने किसने दायर की है याचिका…

इसकी याचिका यूपी के बुलंदशहर की शबनम ने दायर की है।शबनम ने अपनी याचिका में कहा है कि बहु विवाह और निकाह हलाला का बचाव इस आधार पर नहीं हो सकता है कि ये परंपरा पर्सनल लॉ के दायरे में आती है इसलिए उनकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती है।

याचिकाकर्ता बुलंदशहर में अपने ससुराल में रह रही है।उसका पति किसी दूसरी महिला से शादी कर चुका है।दूसरी शादी करने के बाद उसे बाहर निकाल दिया गया।

मुस्लिम धर्मगुरुओं का है एतराज़…

मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि ऐसा कोई फैसला नही होना चाहिए जिससे मुस्लिम मामलो में सरकार के दखल का मार्ग खुल जाए।हलाला इस्लाम में नहीं है लेकिन बहु विवाह में शर्तो के साथ ढील देने चाहिए।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम बहुविवाह, निकाह हलाला, निकाह मुता और निकाह मिस्यार के खिलाफ दायर की गईं 4 याचिकाओं पर केंद्र सरकार और लॉ कमीशन को नोटिस जारी किया है। साथ ही यह केस 5 जजों की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच के पास ट्रांसफर कर दिया है।

याचिकाओं में मुस्लिम समाज में प्रचलित शादी की इन प्रक्रियाओं को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की गई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक देने को गैरकानूनी घोषित कर चुका है।