ईरान के सिर्फ एक ये फैसला भारत को पड़ जाएगा इतना भारी….

ईरान और अमरीका के रिश्ते एक बार फिर ख़राब हो रहे हैं।पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिश्तों में विशेष सुधार किया था लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से ही दोनों के रिश्ते फिर ख़राब हो गए हैं।जो बात ज़बानी जंग तक थी अब वो ट्रेड तक आ गयी है।

अमरीका ने ईरानी तेल निर्यात को 0 तक पहुँचाने की धमकी दे डाली है तो ईरान ने भी साफ़ कर दिया है कि वो झुकने वाला नहीं है। ईरान ने कहा है कि अगर उसके साथ इस तरह का भेदभाव किया जाता है तो दूसरे क्षेत्रीय देशों को भी तेल निर्यात नहीं करने दिया जाएगा।

आपको बता दें कि सऊदी अरब, ईरान, UAE, कुवैत, और ईराक़ जैसे देश अपना तेल स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ के ज़रिये ही दुनिया के बाज़ार तक पहुँचाता है।क़तर से दुनिया के बाज़ार में जाने वाली LNG गैस भी इसी मार्ग से होकर जाती है।

इस बीच ईरान की इस्लामी क्रांति की सेना IRGC ने साफ़ कह दिया है कि स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ या तो सभी देशों के लिए है या फिर किसी के लिए नहीं।ऐसे में स्थिति युद्ध की भी हो सकती है क्यूँकि अमरीका किसी तरह से सुरक्षा देने की कोशिश तो करेगा लेकिन ईरान की मज़बूत सैन्य शक्ति से वो कब तक बाक़ी देशों को संरक्षण देगा।

आपको बता दें कि हर रोज़ स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ से 14 तेल के टैंकर गुज़रते हैं, इसका अर्थ है कि हर रोज़ 1 करोड़ 70 लाख बैरल तेल गुज़रता है।ये विश्व तेल निर्यात का 50% है।

अगर इस रास्ते से तेल बाज़ार नहीं पहुँच पाता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुक़सान होगा। ऐसे में कच्चे तेल की क़ीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से 250 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। भारत जैसे देशों में तेल की क़ीमत 300 से 400 रूपये तक पहुँच सकती है जो कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर होगा।