अल्लाह पर यकीन किया और आज बन गए दुनिया के सबसे बेहतरीन वजीर-ए-आलम

आज तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यप एर्दोगान को कौन नहीं जानता। एर्दोगान इजराइल से लोहा लेने वाले एक ताकतवर नेता माने जाते हैं। लेकिन क्या आप इस ताकतवर नेता की निजी ज़िन्दगी से भी वाकिफ हैं।एर्दोगान इस मुकाम पर कैसे पहुंचे, इस सफर में उन्हें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने राजनीति में आने का फैसला कब और कैसे लिया?

आईये आज आपको बताते हैं तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यप एर्दोगान के बारे में। इनका जन्म सन 1954 में तुर्की की राजधानी इंस्ताबुल के करीबी शहर क़ासिम पाशा में हुआ था। मूलरूप से एर्दोगान का परिवार रिजा राज्य से था। लेकिन वह वह यहाँ पर आकर बस गए थे। इनके पिता का नाम अहमद एर्दोगान और माता का नाम तन्ज़िला एर्दोगान था। पिता नेवी में अफसर थे, जिस कारण रजब तैय्यप एर्दोगान का बचपन समुद्र के किनारे पर ही बीता था।

आपको बता दें कि पढ़ाई के दौरान रजब तैय्यप एर्दोगान इंस्ताबुल की सड़कों पर नीबूं सोडा पानी और तिल लगी हुई रोटी बेचा करते थे। जिससे थोड़े पैसे मिलते थे और उनका जेब खर्च निकल जाता था।एर्दोगान को शुरू से यकीन था कि वो जो भी नेक काम सोचेंगे अगर इमानदारी से प्रयास करेंगे तो उसमे अल्लाह उनकी मदद करेगा,इसके बाद पढ़ाई के दौरान इनकी मुलाकात तुर्की देश इस्लामवादी नेता से हुई।

इसी दौरान उन्होंने तुर्की के इस्लामवादी आंदोलन में प्रवेश किया और यहीं से एर्दोगान ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।तय्यब एर्दोगान ने राजनीति की पहली सीढ़ी पर 1994 में क़दम रखा। जब वह इंस्ताबुल के मेयर बने।लेकिन उस समय एक इस्लाम वादी व्यक्ति का इस पद पर बने रहना आसान नही था और एक दिन वही हुआ जिसकी उम्मीद थी।

एर्दोगान को पद से बर्खास्त कर दिया हलाकि उस वक़्त जनता की 70 साल पुरानी पानी की समस्या पाईप लाईन बिछवाकर खत्म कर दिया।इसका उन्हें लाभ मिला और 2003 से 2014 तक तुर्की के प्रधानमंत्री बने 2014 से अब तक तुर्की के राष्ट्रपति हैं।