चेन्नई के इस मुस्लिम लड़के रोशन किया मुसलमानों का नाम, देश को मिला दूसरा कलाम

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का नाम कौन नहीं जानता। हम सभी चाहते हैं कि हम भी कलाम साहब की तरह देश का नाम रौशन करें। जाने कितने युवा देश में वैज्ञानिक बन्ना चाहते हैं और इसमें कोई शक की बात नहीं है कि इन सभी की प्रेरणा अब्दुल कलाम हैं।

साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट एपीजे अब्दुल कलाम की बातों को सुनते समझते भी हैं और सोचते हैं कि किसी रोज़ देश का नाम उसी तरह रौशन करेंगे जैसे कलाम ने किया।

आपको बताएं कि भारत में बेंतहा टैलेंट है। १२वीं कक्षा में पढने वाले रिफ़त शाहरुख़ भी बेशुमार टैलेंट के धनी हैं। रिफ़त ने दुनिया का सबसे छोटा सॅटॅलाइट बनाया है। उन्होंने ऐसा कारनामा करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। रिफ़त ने ऐसा करके हमारे देश का नाम दुनिया के पटल पर और ऊँचा कर दिया है।

चेन्नई के १२वीं कक्षा के छात्र रिफ़त ने एक ऐसा सॅटॅलाइट बनाया है जो सबसे हल्का और सबसे छोटा है। इस कारण वो पूरी दुनिया की मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। उसकी पॉपुलैरिटी कुछ उसी तरह है जिस तरह एपीजे अब्दुल कलाम की थी।

आपको जानकार हैरानी होगी कि रिफ़त की उम्र अभी महज़ 18 साल की है। इस छात्र के कारनामे ने एक बार फिर अब्दुल कलाम की यादों को ताज़ा कर दिया है। इस सॅटॅलाइट को बनाने में उनके साथ ५ और लोग भी थे।

इसको रिफत ने सैटेलाइट यूएस स्पेस एजेंसी नासा और आईडूडललर्निंग इंक (ग्लोबल एजुकेशन कंपनी) के सामूहिक तत्वाधान में आयोजित ‘क्यूब्स इन स्पेस’ कॉन्टेस्ट के दौरान बनाया था।। उन्होंने इसका नाम कलाम SAT रखा है जो एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर ही है। इस सॅटॅलाइट का वज़न महज़ 100 ग्राम है।

भारत ने कुछ महीने पहले ही स्पेस में 104 सैटेलाइट एक साथ भेजकर एक नया कीर्तिमान बनाया था। अब भारत के हिस्से गर्व का एक और पल आने वाला है। जानकारी के मुताबिक, चेन्नई के 12वीं क्लास में पढ़ने वाले एक छात्र ने दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट तैयार किया है।

मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 साल के रिफत शाहरुख ने एक ऐसी चीज तैयार की है जिसे वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट बताया है। रिफत ने ये सैटेलाइट यूएस स्पेस एजेंसी नासा और आईडूडललर्निंग इंक (ग्लोबल एजुकेशन कंपनी) के सामूहिक तत्वाधान में आयोजित ‘क्यूब्स इन स्पेस’ कॉन्टेस्ट के दौरान बनाया।