अलवर हत्याकांड ने किया देश को शर्मसार, रकबर की हत्या ने मचाया दुनियाभर में हंगामा

देश में लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाएं अब सिर्फ भारतीय मीडिया में ही नहीं, बल्कि विदेशी मीडिया में भी सुर्खियां बनकर देश को शर्मसार कर रही हैं। राजस्थान के अलवर में हुई रकबर की हत्या संसद में बहस का हिस्सा बनी।

आरोप है कि अलवर के रामगढ़ थाना क्षेत्र में कथित गोरक्षकों ने रकबर की बुरी तरह पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। ये बात भी सामने आई है कि रकबर को अस्पताल ले जाने में पुलिस ने कोताही बरती।

पुलिस कोई तीन घंटे बाद रकबर को पास के सरकारी अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दुनिया के प्रमुख अखबारों ने अपने-अपने अंदाज में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

द गार्जियन

‘द गार्जियन’ ने इससे जुड़ी ख़बर को शीर्षक दिया है, ‘भीड़ के हमले में घायल शख्स की मदद से पहले भारतीय पुलिस ने चाय पी।’ इसमें बताया गया है कि उन अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है जो पीडि़त को अस्पताल ले जाने से पहले चाय पीने लगे थे। भारत में गाय की रक्षा के लिए गौरक्षकों का दल अक्सर हाइवे पर घूमता रहता है।

अल-जजीरा

अल जजीरा ने ‘भारत: गाय के चलते हुई हत्या के कारण गांव में मातमÓ शीर्षक के साथ अलवर की घटना को प्रकाशित किया है। इसमें घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया गया है कि तथाकथित गोरक्षकों ने शनिवार को लालावंडी गांव में 28 साल के एक मुस्लिम शख्स की हत्या कर दी। खबर में ये भी लिखा गया है कि उत्तर भारत में गोरक्षक गाय को बचाने के लिए अक्सर घूमते रहते हैं जिसके कारण भारत में मुस्लिमों पर कई हमले हुए हैं। ये मुस्लिम विरोधी हिंसक अपराधों का पहला मामला नहीं है।

मलेशिया : द सन डेली

इसी खबर को मलेशिया की न्यूज वेबसाइट ‘द सन डेली’ ने ‘गाय ले जा रहे भारतीय मुस्लिम की भीड़ के हमले में हत्या’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया है। विदेशी मीडिया ने इस घटना में पुलिस की लापरवाही को भी खबर बनाया है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट

इसी खबर को ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने भी जगह दी है। उन्होंने लिखा है कि पीडि़त को अस्पताल ले जाने की बजाय चाय पीने पर भारतीय पुलिस के खिलाफ जांच। विदेशी मीडिया में सिर्फ अलवर की घटना नहीं, बल्कि पहले की मॉब लिचिंग की घटनाओं को भी प्रकाशित किया जाता रहा है।

जयंत सिन्हा छाए द न्यूयॉर्क टाइम्स में

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या के अभियुक्तों को माला पहनाने की खबर भी दी है। आरोप है कि अंसारी को भीड़ ने गो-तस्करी के शक में पीट-पीटकर मार दिया था। इस खबर का शीर्षक दिया गया है, ‘नफरत के नशे में भारतीय नेता ने जान लेने वाली भीड़ का सम्मान किया।

इसमें जयंत सिन्हा के राजनीति में आने से पहले से लेकर अब तक के बदलावों को बताया गया है। जैसे कि जयंत सिन्हा हार्वर्ड से ग्रेजुएट हैं। उन्होंने अमरीका में काम किया है। उनके अमरीकी दोस्त उन्हें उदार और प्रगतिशील नेता बताते हैं। लेकिन फिर वो भारत आए। उन्होंने कोट-पैंट की जगह कुर्ता पहनना शुरू कर दिया और एक हिंदू दक्षिणपंथी संगठन से जुड़ गए। अभी इसी महीने उन्होंने मॉब लिंचिंग के अभियुक्तों को माला पहनाकर सम्मानित किया।

इसके अलावा ‘द सन’ में असम में भीड़ के पीटने से हुई दो युवकों की हत्या को भी जगह दी गई है। इसके लिए उन्होंने शीर्षक दिया है ‘व्हाट्सऐप मैसेज में गलत अफवाह के कारण दो युवकों की हत्या।’ इसमें असम के कार्बी-आंग्लोंग जि़ले की उस घटना का जिक्र किया गया है जिसमें दो युवकों अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास को बच्चा चोरी के शक में पीट-पीट कर मार दिया गया था।

जबकि दोनों युवक घूमने के लिए वहां आए थे। एक अफवाह के कारण उनकी जान ले ली गई। वहीं कई न्यूज वेबसाइट्स ने लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सोशल मीडिया वॉट्सएप के नए नियमों से जुड़ी खबर भी दी है।